Tuesday, February 5, 2013

तेरी बद्दुआ का ना मुझ पर कोई असर होगा 
बद्दुआ देने से पहले तुझे मेरा फिकर होगा 
तेरी हर बद्दुआ भी दुआ सी लग जायेगी मुझे 
तुझसा, चाहने वाला ना कोई सितमगर होगा
चेहरे पर नूर जुबाँ पर खामोशियाँ मिली
 
सलवटों में रात की सरगोशियाँ मिलीं
 
चेहरा पढ़ दिल की बात समझ लेतें हैं वो 
आपसी रिश्तों की नजदीकियां मिलीं
....

तू ख्वाबों में आ आ कर मुझको सताती है
ये कैसी बेबसी मेरी मैं सो भी नहीं सकता



अपने जुल्मों का हिसाब आज उसके पास नहीं 
अपने कर्मों की किताब आज उसके पास नहीं 
जख्म देने वाले से शिकायत करूँ भी तो कैसे 
मेरी किसी बात का जबाब आज उसके पास नहीं 

तेरी मुहब्बत में यूँ मेरा नाम हो जाए 
दिल हो तेरा और मुझे धड़कन कहे जमाना