गर्म साँसों की महक से सराबोर हुआ मैं
उलझ आँचल में उनके कमजोर हुआ मैं
आया गिरफ्त में जब हाल ए दिल उनका
हटा कर परदे हया के कुछ और हुआ मैं
खेल कर बल खाती घटाओं से काली
एक माहजबीं के चित का चोर हुआ मैं
थम जाएँ चाहत के लम्हें सदा के लिए
दस्त ए दुआ को खुदा की ओर हुआ मैं
रिश्तों में रिश्तों का सिरमोर हुआ मैं
अटूट बंधन को विश्वास की डोर हुआ मैं....अंजना
उलझ आँचल में उनके कमजोर हुआ मैं
आया गिरफ्त में जब हाल ए दिल उनका
हटा कर परदे हया के कुछ और हुआ मैं
खेल कर बल खाती घटाओं से काली
एक माहजबीं के चित का चोर हुआ मैं
थम जाएँ चाहत के लम्हें सदा के लिए
दस्त ए दुआ को खुदा की ओर हुआ मैं
रिश्तों में रिश्तों का सिरमोर हुआ मैं
अटूट बंधन को विश्वास की डोर हुआ मैं....अंजना
वाह बहुत सुन्दर ग़ज़ल है बधाई
ReplyDeleteपसंदगी के लिए आभार नील जी
Deleteजी शुक्रियाँ
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