तिलिस्म सी लगती है ये जिंदगी
जिसे चाहते हैं वो मिलता नहीं है
जिसे चाहते हैं वो मिलता नहीं है
चाहतों को अपना बनाएं कैसे
कहने को फ़क़त हौसला नहीं है
कहने को फ़क़त हौसला नहीं है
अजनबी को अपना बना लेते हैं हम
वो जानकर भी अपना कहता नहीं है
वो जानकर भी अपना कहता नहीं है
दिल खोलकर रख देते हैं हम
वो भावनाओं में बहता नहीं है
वो भावनाओं में बहता नहीं है
बनू सुहागन हसरत ये थी
होता कोई हादसा ही नहीं है
होता कोई हादसा ही नहीं है
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