रात के सायों में हम नज़र आते नहीं
किसी से इतनी नजदीकी हम जताते नहींकल के छोटे छोटे टुकड़े यादों में महफूज हैं कुछ इस तरह
चुराया था वक़्त से उन चन्द हसीन लम्हों को जिस तरहइंसान ने ऐसी दूरबीन बना डाली
गर्भ में ही कन्या मिटा डाली
क्रूरता की हद नापेंगे कहाँ तक
जब जन्म देने वाले ने ही जान ले डालीख्वाबों में दावतों का मज़ा हमने लिया
खाली पेट नींद भी भला आती क्यों नहींआंसुओं को थामा नहीं पलकों की कोर पर
भर गया धरती और आकाश ओर छोर पर.नक्स बड़ा पर अक्स है छोटा
दायरों में सिमटने लगे हैं बड़े लोगना हारने का खौफ है ना जान जाने की फिकर
जिंदगी की दौड़ में खुद को मैं ले जाऊं कहाँ .आँधियों से हमें खौफ नहीं सन्नाटों ने मारा है
हमने तो हर मुसाफिर को लहर लहर पार उतारा है
हाँ मैं एक कश्ती हूँ यह सच है
मैं जिसमें बहती हूँ तू वही एक धारा हैरोका है बहुत खुद को अश्कों को पिया मैंने
जिंदगी का लम्हा लम्हा यूँ ही है जिया मैंने.
मैंने तो शायरी के गुलदस्ते में फ़क़त कांटे ही बोये थे
तुमने जो छुआ कांटो को वो फूल बन कर खिल उठे
शब्दों के समंदर में तुम क्यों इस कदर खो जाते हो
कभी आते हो उथले पानी में नज़र कभी गहरे डूब जाते हो
जिंदगी का हर रंग भाया है हमें
तेरी बेरुखी ने भी लुभाया है हमें.
मैं इस छोर पर हूँ तुम उस छोर पर हो
जुड़े हैं कुछ यूँ जैसे आँसू पलकों की कोर पर हों.
किसी से इतनी नजदीकी हम जताते नहींकल के छोटे छोटे टुकड़े यादों में महफूज हैं कुछ इस तरह
चुराया था वक़्त से उन चन्द हसीन लम्हों को जिस तरहइंसान ने ऐसी दूरबीन बना डाली
गर्भ में ही कन्या मिटा डाली
क्रूरता की हद नापेंगे कहाँ तक
जब जन्म देने वाले ने ही जान ले डालीख्वाबों में दावतों का मज़ा हमने लिया
खाली पेट नींद भी भला आती क्यों नहींआंसुओं को थामा नहीं पलकों की कोर पर
भर गया धरती और आकाश ओर छोर पर.नक्स बड़ा पर अक्स है छोटा
दायरों में सिमटने लगे हैं बड़े लोगना हारने का खौफ है ना जान जाने की फिकर
जिंदगी की दौड़ में खुद को मैं ले जाऊं कहाँ .आँधियों से हमें खौफ नहीं सन्नाटों ने मारा है
हमने तो हर मुसाफिर को लहर लहर पार उतारा है
हाँ मैं एक कश्ती हूँ यह सच है
मैं जिसमें बहती हूँ तू वही एक धारा हैरोका है बहुत खुद को अश्कों को पिया मैंने
जिंदगी का लम्हा लम्हा यूँ ही है जिया मैंने.
मैंने तो शायरी के गुलदस्ते में फ़क़त कांटे ही बोये थे
तुमने जो छुआ कांटो को वो फूल बन कर खिल उठे
शब्दों के समंदर में तुम क्यों इस कदर खो जाते हो
कभी आते हो उथले पानी में नज़र कभी गहरे डूब जाते हो
जिंदगी का हर रंग भाया है हमें
तेरी बेरुखी ने भी लुभाया है हमें.
मैं इस छोर पर हूँ तुम उस छोर पर हो
जुड़े हैं कुछ यूँ जैसे आँसू पलकों की कोर पर हों.
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