मेरा हाथ
उस पर खिंची
कुछ आड़ी तिरछी लकीरें
अक्सर मैं ढूंढती रहती हूँ
इन लकीरों में कुछ ना कुछ
शायद कुछ पढ़ लूँ मैं भी
इनमें छुपा हुआ
और सजा लूँ जिंदगी को
नए रंगों से .............................. ......अंजना
उस पर खिंची
कुछ आड़ी तिरछी लकीरें
अक्सर मैं ढूंढती रहती हूँ
इन लकीरों में कुछ ना कुछ
शायद कुछ पढ़ लूँ मैं भी
इनमें छुपा हुआ
और सजा लूँ जिंदगी को
नए रंगों से ..............................
No comments:
Post a Comment