घायल नज़रें पागल नज़ारे
ये हम पहुँच गए किस धारे
जिनसे कभी नफरत थी हमें
आज वही क्यों लगते प्यारे
पंछी सूरज ओ चाँद सितारे
आ पहुंचे हैं अंगना में हमारे
फिजा महकी मन बहक उठा
जियें तो जियें किसके सहारे
जीता दुश्मन और हम हारे
जाएँ कहाँ अब दर्द के मारे
ये हम पहुँच गए किस धारे
जिनसे कभी नफरत थी हमें
आज वही क्यों लगते प्यारे
पंछी सूरज ओ चाँद सितारे
आ पहुंचे हैं अंगना में हमारे
फिजा महकी मन बहक उठा
जियें तो जियें किसके सहारे
जीता दुश्मन और हम हारे
जाएँ कहाँ अब दर्द के मारे
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