सावन बीत गया मेरा सूखा सर्द रात कटी तन्हाई में
मान भी जाओ सजना मेरे नहीं रखा कुछ रुसवाई में
ले बरात आओ मेरे अंगना मुझ संग व्याह रचाने को
इस बसंत जीवन के हसीं रंग खिला जाओ शहनाई में
मान भी जाओ सजना मेरे नहीं रखा कुछ रुसवाई में
ले बरात आओ मेरे अंगना मुझ संग व्याह रचाने को
इस बसंत जीवन के हसीं रंग खिला जाओ शहनाई में