Sunday, March 3, 2013

चल पड़े हो सफ़र पर मुझको ना भुला देना 
दिल की दौलत को तुम यूँ ही ना लुटा देना

आईने में भी सूरत ए यार नज़र आता है 
अक्स नज़रों से हटाकर यूँ ही ना दगा देना

तेरे प्यार की एक लौ जल उठी है मेरे जीवन में 
बुझाने को इस दिए को तुम यूँ ही ना हवा देना

ये दर्दे दिल तेरे इश्क में बीमार हुआ जाता है 
बिन सहारा दिए बाहों का तुम यूँ ही ना दवा देना

मुझे तो पसंद है दुनिया का हर हसीं रंग
बेरंग मुझको तुम यूँ ही ना फिजा देना

जीवन की इस कश्ती को किया है हवाले तेरे
छोड़ बे सहारा मुझे तुम यूँ ही ना डुबा देना

छुप छुप कर प्यार का मज़ा ही कुछ और है
दास्ताँ ए मुहब्बत को तुम यूँ ही ना फैला देना

मेरी याद अपने दिल से यूँ ही ना मिटा देना
बे वजह मुझको तुम यूँ ही ना सजा देना

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