आज फिर तेरी याद मेरी तन्हाई पर हावी है !
बीते लम्हों को अपने शब्दों में पिरोया मैंने !!
तनहा छोड़ मुझे बेवफाई निभाई तुमने यूँ ही
लिख लिख कर नाम तेरा हर बार धोया मैंने !!
उन निशानियों में ढूंढती हूँ तुमको मैं शौक से
तभी साजो सामाँ हिफाजत से संजोया मैंने !!
तुम नहीं तो जीने की आरजू नहीं रही मुझमे
कुछ पल तेरी यादों में खुद को भिगोया मैंने !!
बड़ी मुद्दतों के बाद जिसे पाया था उसे खोया मैंने !
बीते लम्हों को अपने शब्दों में पिरोया मैंने !!
तनहा छोड़ मुझे बेवफाई निभाई तुमने यूँ ही
लिख लिख कर नाम तेरा हर बार धोया मैंने !!
उन निशानियों में ढूंढती हूँ तुमको मैं शौक से
तभी साजो सामाँ हिफाजत से संजोया मैंने !!
तुम नहीं तो जीने की आरजू नहीं रही मुझमे
कुछ पल तेरी यादों में खुद को भिगोया मैंने !!
बड़ी मुद्दतों के बाद जिसे पाया था उसे खोया मैंने !
गम ए जुदाई में हर बार अश्कों में डुबोया मैंने !
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