चाहत के नाम पर मैं आज घर से बेघर हुआ
फिर भी मुझे उसका प्यार मयस्सर नहीं हुआ
यूँ तो लुटा दिया सब कुछ आशिकी के नाम
मुकाम ए मुहब्बत फिर भी मेरा बेहतर नहीं हुआ
सूना था आशिकी में दिल दुनिया को भुला देते हैं
मेरी जिंदगी में भूलना भुलाना अक्सर नहीं हुआ
मुहब्बत में एक दूजे की धड़कन सुनाई देती है
सुनते हैं लोग फ़रियाद मेरी पर असर नहीं हुआ
तेरे साथ बीते पलों से रौशन मेरा जहां था कभी
रूठने पर तेरे सूरज मेरा कभी रहबर नहीं हुआ
फिर भी मुझे उसका प्यार मयस्सर नहीं हुआ
यूँ तो लुटा दिया सब कुछ आशिकी के नाम
मुकाम ए मुहब्बत फिर भी मेरा बेहतर नहीं हुआ
सूना था आशिकी में दिल दुनिया को भुला देते हैं
मेरी जिंदगी में भूलना भुलाना अक्सर नहीं हुआ
मुहब्बत में एक दूजे की धड़कन सुनाई देती है
सुनते हैं लोग फ़रियाद मेरी पर असर नहीं हुआ
तेरे साथ बीते पलों से रौशन मेरा जहां था कभी
रूठने पर तेरे सूरज मेरा कभी रहबर नहीं हुआ
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