Sunday, March 3, 2013

सावन बीत गया मेरा सूखा सर्द रात कटी तन्हाई में 
मान भी जाओ सजना मेरे नहीं रखा कुछ रुसवाई में 
ले बरात आओ मेरे अंगना मुझ संग व्याह रचाने को 
इस बसंत जीवन के हसीं रंग खिला जाओ शहनाई में

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