जिंदगी है बिसात शतरंज की
रोज बिछती है प्यादे चलते हैं
जीत जाते हैं खेल पैसे वाले
गरीब तो सिर्फ हाथ मलते हैं
हो गया अमीरी का ये चलन
यहाँ कुत्ते भी घरों में पलते हैं
अपनों के लिए वक़्त हुआ तंग
दिल इनके क्लबों में बहलते हैं
भावनाओं का कोई मोल नहीं
रिश्ते को कपड़ों सा बदलते हैं
रात उगा लेते हैं सूरज खुद का
दिन इनकी मर्जी से ही ढलते हैं
रोज बिछती है प्यादे चलते हैं
जीत जाते हैं खेल पैसे वाले
गरीब तो सिर्फ हाथ मलते हैं
हो गया अमीरी का ये चलन
यहाँ कुत्ते भी घरों में पलते हैं
अपनों के लिए वक़्त हुआ तंग
दिल इनके क्लबों में बहलते हैं
भावनाओं का कोई मोल नहीं
रिश्ते को कपड़ों सा बदलते हैं
रात उगा लेते हैं सूरज खुद का
दिन इनकी मर्जी से ही ढलते हैं
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