दिल से दर्द रुखसत होने को है
हमें ग़मों से फुर्सत होने को है
दुश्मनों के खेमे में दोस्ती के चर्चे
कुछ जीने की मोहलत होने को है
परते उठने लगीं जो हर किरदार से
रुबरू जिंदगी से हकीकत होने को है
इज़हार ए प्यार लबों की ख़ामोशी में
आज नज़रों की बदौलत होने को है
हुए उनके दिल ए जागीर का हिस्सा
पूरी रियासत ए हसरत होने को है
आज फिर कोई क़यामत होने को है
रूह संग रूह की रिफ़ाक़त होने को है
हमें ग़मों से फुर्सत होने को है
दुश्मनों के खेमे में दोस्ती के चर्चे
कुछ जीने की मोहलत होने को है
परते उठने लगीं जो हर किरदार से
रुबरू जिंदगी से हकीकत होने को है
इज़हार ए प्यार लबों की ख़ामोशी में
आज नज़रों की बदौलत होने को है
हुए उनके दिल ए जागीर का हिस्सा
पूरी रियासत ए हसरत होने को है
आज फिर कोई क़यामत होने को है
रूह संग रूह की रिफ़ाक़त होने को है
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