दिल पर चोट खाने को कर बैठी मुहब्बत नादान
ना चरागरों की जरूरत ना खाली होंगे मरहमदान
मिलकर ना मिले फिर भी दो आलम से गुजरे हम
लिबासे-दुनयवी में रह चुप जीवन कर लिया बियावान
ना चरागरों की जरूरत ना खाली होंगे मरहमदान
मिलकर ना मिले फिर भी दो आलम से गुजरे हम
लिबासे-दुनयवी में रह चुप जीवन कर लिया बियावान
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