जीवन कि चढ़ती उतरती धूप में कुछ अपनों का सहारा होता
डगमगाते हुए कुछ अहसासों को मेरे अपनों ने उबारा होता
यूँ तो तनहा ही डूब जाते हैं लोग बीच मझधार में
हर किसी की किस्मत में नहीं किनारा होता
डगमगाते हुए कुछ अहसासों को मेरे अपनों ने उबारा होता
यूँ तो तनहा ही डूब जाते हैं लोग बीच मझधार में
हर किसी की किस्मत में नहीं किनारा होता
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