जहां गूंजती थी महफ़िल यारों से वहां आज सन्नाटा है
बेरहम वक़्त का मेरे मुंह पर यह कैसा तमाचा है
रोता हुआ सा बच्चा बन मैं अपने गाल सहलाती हूँ
बीते वक़्त की यादों को मैं स्वेटर सा बुनती जाती हूँ
बेरहम वक़्त का मेरे मुंह पर यह कैसा तमाचा है
रोता हुआ सा बच्चा बन मैं अपने गाल सहलाती हूँ
बीते वक़्त की यादों को मैं स्वेटर सा बुनती जाती हूँ
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