स्वार्थ इंसान को अँधा बना देता है सुना था
तुम भी इतने स्वार्थी निकलोगे सोचा ना था
हँसते खेलते संग में बीत जाता था समय हमारा
तुम हमारी हंसी पर ही पाबन्दी लगाओगे सोचा न था
नादान थे हम जो दोस्त समझ नादानियां करते गए
तुम हमारी नादानी को यूँ दिल से लगाओगे सोचा ना था
तुम भी इतने स्वार्थी निकलोगे सोचा ना था
हँसते खेलते संग में बीत जाता था समय हमारा
तुम हमारी हंसी पर ही पाबन्दी लगाओगे सोचा न था
नादान थे हम जो दोस्त समझ नादानियां करते गए
तुम हमारी नादानी को यूँ दिल से लगाओगे सोचा ना था
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