यूँ ही कोई किसी से दिल लगाया नहीं करता
यूँ ही कोई किसी के करीब आया नहीं करता
अनजान बन महबूबा की हर तकलीफ से
कोई यूँ ही दूरी बढाया नहीं करता
समय के पहिये ने भी शायद आज करवट बदली है
नहीं तो कोई कोई यूँ अपनी महबूबा से रुंठ जाया नहीं करता
यूँ ही कोई किसी के करीब आया नहीं करता
अनजान बन महबूबा की हर तकलीफ से
कोई यूँ ही दूरी बढाया नहीं करता
समय के पहिये ने भी शायद आज करवट बदली है
नहीं तो कोई कोई यूँ अपनी महबूबा से रुंठ जाया नहीं करता
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