सिर्फ औरों से नहीं आज खुद से भी दूर हैं हम
ए जिंदगी आज कुछ ज्यादा ही मजबूर हैं हम
सितम सहने की आदत है हमें ज़माने भर के
पर उसके हर सितम से दूर बहुत दूर है हम
अब नज़र फेर कर भी देखता नहीं वो हमारी ओर
कभी कहता था इस दुनिया में असल कोहिनूर हैं हम
आज मेरी मांग को वो सूना करके चला गया
कभी कहता था तेरी मांग का सुर्ख सिन्दूर हैं हम
ए जिंदगी आज कुछ ज्यादा ही मजबूर हैं हम
ए जिंदगी आज कुछ ज्यादा ही मजबूर हैं हम
ए जिंदगी आज कुछ ज्यादा ही मजबूर हैं हम
सितम सहने की आदत है हमें ज़माने भर के
पर उसके हर सितम से दूर बहुत दूर है हम
अब नज़र फेर कर भी देखता नहीं वो हमारी ओर
कभी कहता था इस दुनिया में असल कोहिनूर हैं हम
आज मेरी मांग को वो सूना करके चला गया
कभी कहता था तेरी मांग का सुर्ख सिन्दूर हैं हम
ए जिंदगी आज कुछ ज्यादा ही मजबूर हैं हम
ए जिंदगी आज कुछ ज्यादा ही मजबूर हैं हम
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