जीवन में हर पल अनमोल होता है उन्ही अनमोल पलों में से कुछ पल हमारे लिए निकालें यही गुजारिश है
Sunday, August 25, 2013
Tuesday, August 6, 2013
दिल की धडकनों को तुम यूँ छुपाओ ना 'महक'
बात गुजरने से पहले फ़साना बनाओ ना 'महक '
किस्से मशहूर हैं बहुत ज़माने में मुहब्बत के
किस्सा ए वफ़ा खुद का आजमाओ ना 'महक '
ना कह रात की रानी ना कर गुलाब की बातें
इन बहकती साँसों को यूँ बहकाओ ना 'महक '
खिलते नूर को छुपाने की अदा भाई नहीं हमें
उलझी लटों को और अब सुलझाओ ना 'महक '
मैं नहीं काबिले मुहब्बत जमाना यही कहता है
तुम अपनी वादे वफ़ा मुझ पर लुटाओ ना 'महक '
तासीर से ज़माने की डर लगता नहीं है मुझको
इन सुलग रहे शोलों को और भड़काओ ना 'महक'
मेरे मन का बावरा पंछी बहुत नादान हो रहा है
तुम अपने जज्बात को हवा में उडाओ ना 'महक '
मिरे ख्वाबों की बस्तियां भी बर्बाद हो गयी है
तुम मुहब्बत का गुचा ए गुल खिलाओ ना 'महक '
महकती चांदनी रातों में बाहर आओ ना 'महक '
इस शबनमी बरसात में तुम यूँ नहाओ ना 'महक '.
बात गुजरने से पहले फ़साना बनाओ ना 'महक '
किस्से मशहूर हैं बहुत ज़माने में मुहब्बत के
किस्सा ए वफ़ा खुद का आजमाओ ना 'महक '
ना कह रात की रानी ना कर गुलाब की बातें
इन बहकती साँसों को यूँ बहकाओ ना 'महक '
खिलते नूर को छुपाने की अदा भाई नहीं हमें
उलझी लटों को और अब सुलझाओ ना 'महक '
मैं नहीं काबिले मुहब्बत जमाना यही कहता है
तुम अपनी वादे वफ़ा मुझ पर लुटाओ ना 'महक '
तासीर से ज़माने की डर लगता नहीं है मुझको
इन सुलग रहे शोलों को और भड़काओ ना 'महक'
मेरे मन का बावरा पंछी बहुत नादान हो रहा है
तुम अपने जज्बात को हवा में उडाओ ना 'महक '
मिरे ख्वाबों की बस्तियां भी बर्बाद हो गयी है
तुम मुहब्बत का गुचा ए गुल खिलाओ ना 'महक '
महकती चांदनी रातों में बाहर आओ ना 'महक '
इस शबनमी बरसात में तुम यूँ नहाओ ना 'महक '.
तन्हाइयों में जीना अब मेरी कहानी है |
बहता हुआ दरिया मेरी आँख का पानी है ||१||
फरेबे मशीयत का मुझे अंदाजा ही न था |
वो छलता रहा औ मैं समझी रिश्ता रूहानी है||२||
यूँ ही उलझ कर रह गयीं अपनी निस्बतें |
एक जान्दान ए कैद में जी रही मेरी जवानी है||३ ||
रंजो गम को भूल अपनीं हस्ती अब लुटानी है |
मेरी बहकती साँसे तेरी मुहब्बत की रवानी है ||४ ||
टूटती उम्मीदों को नयी रौशनी दिखानी है |
उसके नाम की मेहँदी अपने हाथों में रचानी है ||५ ||
खुद मिटने से पहले जुनून ए चाहत निभानी है |
बन मिसाल ए मुहब्बत दिलों में आग लगानी है ||६ ||
लबों से गम के साए पे मुस्कान खिलानी है |
अब आंसुओं को भूल कुछ खुशियाँ चुरानी है || ७ ||.
बहता हुआ दरिया मेरी आँख का पानी है ||१||
फरेबे मशीयत का मुझे अंदाजा ही न था |
वो छलता रहा औ मैं समझी रिश्ता रूहानी है||२||
यूँ ही उलझ कर रह गयीं अपनी निस्बतें |
एक जान्दान ए कैद में जी रही मेरी जवानी है||३ ||
रंजो गम को भूल अपनीं हस्ती अब लुटानी है |
मेरी बहकती साँसे तेरी मुहब्बत की रवानी है ||४ ||
टूटती उम्मीदों को नयी रौशनी दिखानी है |
उसके नाम की मेहँदी अपने हाथों में रचानी है ||५ ||
खुद मिटने से पहले जुनून ए चाहत निभानी है |
बन मिसाल ए मुहब्बत दिलों में आग लगानी है ||६ ||
लबों से गम के साए पे मुस्कान खिलानी है |
अब आंसुओं को भूल कुछ खुशियाँ चुरानी है || ७ ||.
Monday, August 5, 2013
मेरी नींदों में आ गया कोई
नए ख़्वाब सजा गया कोई
मेरी तन्हाई मिटा गया कोई
नयी उमंग जगा गया कोई
मैं थी ठहरे हुए पानी की तरह
उस पे हलचल मचा गया कोई
बिन पतवार कश्ती सी जिंदगी
उसे लहरों से खिला गया कोई
मैं उड़ने लगी पंछियों की तरह
सोये अरमां जगा गया कोई
दिल अनजान था धडकनों से मेरी
रूह का रिश्ता बना गया कोई
जिंदगी में हसीं रंग खिला गया कोई
पतझड़ को मधुमास बना गया कोई .
नए ख़्वाब सजा गया कोई
मेरी तन्हाई मिटा गया कोई
नयी उमंग जगा गया कोई
मैं थी ठहरे हुए पानी की तरह
उस पे हलचल मचा गया कोई
बिन पतवार कश्ती सी जिंदगी
उसे लहरों से खिला गया कोई
मैं उड़ने लगी पंछियों की तरह
सोये अरमां जगा गया कोई
दिल अनजान था धडकनों से मेरी
रूह का रिश्ता बना गया कोई
जिंदगी में हसीं रंग खिला गया कोई
पतझड़ को मधुमास बना गया कोई .
लबों पे उनके जब भी मेरे निशाँ होंगे
याद करेंगे वो मुझे ही जहां जहां होंगे
न रुखसती होगी न फिर तन्हाई होगी
ना फांसले हम दोनों के दरमियाँ होंगे
सामने बैठ सुनेंगे धडकनों की कही
अनकहे जज्बात नजरों से बयाँ होंगे
चंद लम्हों में जी लेंगे जिंदगी पूरी
ऐसे हसीं पल और फिर कहाँ होंगे
गुज़र जाउंगी रगों में तेरी लहू बनकर
जब भी पूरे मेरे ख्वाबों के कारवां होंगे
अब न खौफ ए जिंदगी न तूफां होंगे
खिलती कलियाँ महकते गुलिस्तां होंगे
याद करेंगे वो मुझे ही जहां जहां होंगे
न रुखसती होगी न फिर तन्हाई होगी
ना फांसले हम दोनों के दरमियाँ होंगे
सामने बैठ सुनेंगे धडकनों की कही
अनकहे जज्बात नजरों से बयाँ होंगे
चंद लम्हों में जी लेंगे जिंदगी पूरी
ऐसे हसीं पल और फिर कहाँ होंगे
गुज़र जाउंगी रगों में तेरी लहू बनकर
जब भी पूरे मेरे ख्वाबों के कारवां होंगे
इस जहां में होगी जन्नत हासिल
जिस लम्हें हम दो दिल एक जाँ होंगे
जिस लम्हें हम दो दिल एक जाँ होंगे
अब न खौफ ए जिंदगी न तूफां होंगे
खिलती कलियाँ महकते गुलिस्तां होंगे
लबो से अपने बस एक जाम दे दो मुझे
मुद्दतों से प्यासा हूँ एक हसीं शाम दे दो मुझे
चाहा तो बहुत मगर गुस्ताखियाँ मुझसे ना हुईं
मेरी शराफत का एक छोटा सा इनाम दे दो मुझे
यूँ ही बुझा लूँगा मैं अपने अरमानो की प्यास
बसा लो दिल में चाहे मौत का फरमान दे दो मुझे
याद रह जाएँ जो सदियों तक ये बीते हुए लम्हें
मेरी तन्हाई मिटाने का ऐसा इंतजाम दे दो मुझे
मेरे हालात को मंजूर नहीं सौदा मेरे दिल का
नीलाम न हो मुहब्बत ऐसा कोई काम दे दो मुझे
जिंदगी में खुद की एक मुकाम दे दो मुझे
झूठा ही सही अपनी मुहब्बत का पैगाम दे दो मुझे.
मुद्दतों से प्यासा हूँ एक हसीं शाम दे दो मुझे
चाहा तो बहुत मगर गुस्ताखियाँ मुझसे ना हुईं
मेरी शराफत का एक छोटा सा इनाम दे दो मुझे
यूँ ही बुझा लूँगा मैं अपने अरमानो की प्यास
बसा लो दिल में चाहे मौत का फरमान दे दो मुझे
याद रह जाएँ जो सदियों तक ये बीते हुए लम्हें
मेरी तन्हाई मिटाने का ऐसा इंतजाम दे दो मुझे
मेरे हालात को मंजूर नहीं सौदा मेरे दिल का
नीलाम न हो मुहब्बत ऐसा कोई काम दे दो मुझे
जिंदगी में खुद की एक मुकाम दे दो मुझे
झूठा ही सही अपनी मुहब्बत का पैगाम दे दो मुझे.
आजकल हम जल्दी ही बिस्तर पर जाने लगे
ख़्वाबों को दुनिया को हम भी आजमाने लगे
दिन उसके साथ में काटा और रात उसके ख़्वाबों में
हाल ऐसा हुआ एक दूजे के संग पहरों बिताने लगे
सोते जागते बस उसी की तस्वीर रहती है सामने
अब आईने में भी हमें उनके अक्स नज़र आने लगे
सपना टूटा तो समझ आया अपने फितूर का फलसफा
दोस्तों लम्बी सर्द रातो को हम नींद से घबराने लगे
ख़्वाबों को दुनिया को हम भी आजमाने लगे
दिन उसके साथ में काटा और रात उसके ख़्वाबों में
हाल ऐसा हुआ एक दूजे के संग पहरों बिताने लगे
सोते जागते बस उसी की तस्वीर रहती है सामने
अब आईने में भी हमें उनके अक्स नज़र आने लगे
सपना टूटा तो समझ आया अपने फितूर का फलसफा
दोस्तों लम्बी सर्द रातो को हम नींद से घबराने लगे
बरसो लग जाते हैं चन्द रिश्तों को बनाने में
क्या रखा है ए दोस्त यूँ रिश्तों को उलझाने में
बेसबब यूँ ना अब और नखरे दिखाइये जी
देर लगती नहीं हमें भी फिर आइना दिखाने में
यूँ तो रूठ जाते हैं तमाम लोग हमसे अक्सर
पर देर करते नहीं हम रूठे यार को मनाने में
बेरुखी इतनी भी अधिक सनम ठीक नहीं है
जो हम रूठे तो अकेले रह जाओगे बुत खाने में
तनहा रह जाता है जो आता नहीं समझाने में
होता नहीं कुछ हासिल यूँ झूठी शान दिखाने में
छलक जाते हैं पैमाने क्यों रूठे यार को मनाने में
ख़ुशी मिलती है बहुत बिगड़े रिश्तों को सुलझाने में
क्या रखा है ए दोस्त यूँ रिश्तों को उलझाने में
बेसबब यूँ ना अब और नखरे दिखाइये जी
देर लगती नहीं हमें भी फिर आइना दिखाने में
यूँ तो रूठ जाते हैं तमाम लोग हमसे अक्सर
पर देर करते नहीं हम रूठे यार को मनाने में
बेरुखी इतनी भी अधिक सनम ठीक नहीं है
जो हम रूठे तो अकेले रह जाओगे बुत खाने में
तनहा रह जाता है जो आता नहीं समझाने में
होता नहीं कुछ हासिल यूँ झूठी शान दिखाने में
छलक जाते हैं पैमाने क्यों रूठे यार को मनाने में
ख़ुशी मिलती है बहुत बिगड़े रिश्तों को सुलझाने में
जिंदगी तो जी तमाम पर कभी खिलखिलाई नहीं
आज से पहले कभी मैं मुहब्बत ए आबशार में नहाई नहीं
कहानी मुहब्बत की लिखने को तरसती रही उम्र भर
पर लिख सके जो मुहब्बत मेरे पास वो रोशनाई नहीं
धड़कने बढ़ी इतनी के जज्बात काबू रह ना सके
करने को इजहार ए इश्क हाथों ने कलम उठाई नहीं
मेरा हौसला भी जालिम जमाने के आगे टूट गया
मुझ पर आज तक थी किसी ने तोहमत लगाईं नहीं
कहने को इस शहर में मेरे दीवानो की तादाद बहुत है
पर मेरी जिंदगी में मुझसे किसी ने वफ़ा निभाई नहीं
यूँ तो तलबगार बहुत हैं ‘महक’ पर हक़ जमाने के लिए
मेरी चाहत में दुनिया भुला दे जो मिली वो रहनुमाई नहीं
इंतज़ार ए वफ़ा में मुद्दतों से बीमार हो रही हूँ मैं
मेरी उम्मीदों की खूबसूरत फसल लहलहाई नहीं
आज से पहले कभी मैं मुहब्बत ए आबशार में नहाई नहीं
कहानी मुहब्बत की लिखने को तरसती रही उम्र भर
पर लिख सके जो मुहब्बत मेरे पास वो रोशनाई नहीं
धड़कने बढ़ी इतनी के जज्बात काबू रह ना सके
करने को इजहार ए इश्क हाथों ने कलम उठाई नहीं
मेरा हौसला भी जालिम जमाने के आगे टूट गया
मुझ पर आज तक थी किसी ने तोहमत लगाईं नहीं
कहने को इस शहर में मेरे दीवानो की तादाद बहुत है
पर मेरी जिंदगी में मुझसे किसी ने वफ़ा निभाई नहीं
यूँ तो तलबगार बहुत हैं ‘महक’ पर हक़ जमाने के लिए
मेरी चाहत में दुनिया भुला दे जो मिली वो रहनुमाई नहीं
इंतज़ार ए वफ़ा में मुद्दतों से बीमार हो रही हूँ मैं
मेरी उम्मीदों की खूबसूरत फसल लहलहाई नहीं
इश्क ना हुआ जैसे मौस्मीं बाजार हो गया
बेगानों की बस्ती में हर कोई खरीदार हो गया
हर जगह निकल पड़ी फूल बेचने वालों की चांदी
दिल बिन खुशबू के फूलों का तलबगार हो गया
तड़प रहे हैं सब यहाँ दिल के मारे सितमगर
दिल का मरीज कोई ना था पर बीमार हो गया
सूरत देख दिल की सीरत समझ आ जाती है
दिल ना हुआ जैसे दिलों का व्यापार हो गया
दुश्मनी क्या खूब निभा रहें हैं आपस की दोस्ती में
दो दिलों को मिलाने हर दोस्त भी मददगार हो गया
दूर की सोच रख चिल्ड्रन डे भी क्या इजाद किया गया
वेलेंटाईन डे के नौ माह बाद चिल्ड्रन डे का दीदार हो गया
अंग्रेजी सभ्यता का भूत दीवानों पर सवार हो गया
बसंत मधुमास की जगह वेलेंटाइन का उदगार हो गया.
बेगानों की बस्ती में हर कोई खरीदार हो गया
हर जगह निकल पड़ी फूल बेचने वालों की चांदी
दिल बिन खुशबू के फूलों का तलबगार हो गया
तड़प रहे हैं सब यहाँ दिल के मारे सितमगर
दिल का मरीज कोई ना था पर बीमार हो गया
सूरत देख दिल की सीरत समझ आ जाती है
दिल ना हुआ जैसे दिलों का व्यापार हो गया
दुश्मनी क्या खूब निभा रहें हैं आपस की दोस्ती में
दो दिलों को मिलाने हर दोस्त भी मददगार हो गया
दूर की सोच रख चिल्ड्रन डे भी क्या इजाद किया गया
वेलेंटाईन डे के नौ माह बाद चिल्ड्रन डे का दीदार हो गया
अंग्रेजी सभ्यता का भूत दीवानों पर सवार हो गया
बसंत मधुमास की जगह वेलेंटाइन का उदगार हो गया.
ताख ए गर्द से उसने खतों को निकाला होगा
बड़े जतन से मेरे हर किस्से को सम्भाला होगा
जब पढ़े होंगे अहसास मेरे खुशबू से लबरेज उसने
किस तरह मदहोश हो मन मिलने को मतवाला होगा
कभी मोती गालों पर कतारों में लुढ़क आये होंगे
कभी आंसुओं के समंदर को भीतर ही पाला होगा
मन पंछी सा आसमां में उड़ने को मचल आया होगा
कैसे उसने बिखरने से फिर खुद को सम्भाला होगा
कह ग़ज़ल उसने अपना हर अहसास संवारा होगा
पिरो मोतियों में शब्दों को कुछ इस तरह ढाला होगा
बड़े जतन से मेरे हर किस्से को सम्भाला होगा
जब पढ़े होंगे अहसास मेरे खुशबू से लबरेज उसने
किस तरह मदहोश हो मन मिलने को मतवाला होगा
कभी मोती गालों पर कतारों में लुढ़क आये होंगे
कभी आंसुओं के समंदर को भीतर ही पाला होगा
मन पंछी सा आसमां में उड़ने को मचल आया होगा
कैसे उसने बिखरने से फिर खुद को सम्भाला होगा
कह ग़ज़ल उसने अपना हर अहसास संवारा होगा
पिरो मोतियों में शब्दों को कुछ इस तरह ढाला होगा
यादों की चांदनी उसके आँगन में छिटक आई होगी
एक मासूम कली फिर फूलों सी खिल आई होगी
लट गेसुओं की उसके गालों पर बिखर आई होगी
याद कर बीते लम्हें वो खुद में ही शरमाई होगी
खेली होगी अरमानों संग आँख मिचौली उसने
जवाँ उमंगें सहर की धूप सी अलसाई होगी
सरक आँचल उसके काँधे पर ढलक आया होगा
बेखुदी पर अपनी वो मन ही मन मुस्काई होगी
खुद को उसने जब आईने में संवारा होगा
नज़र उसकी खुद की सूरत पे ठहर आई होगी
अक्स मेरा ही उसे खुद में नज़र आया होगा
एक पल को बिजली सी बदन में लहराई होगी
सुरूर ए इश्क पर वो खुद में ही इठलाई होगी
तड़प मिलने की फिर एक बार उठ आई होगी
एक मासूम कली फिर फूलों सी खिल आई होगी
लट गेसुओं की उसके गालों पर बिखर आई होगी
याद कर बीते लम्हें वो खुद में ही शरमाई होगी
खेली होगी अरमानों संग आँख मिचौली उसने
जवाँ उमंगें सहर की धूप सी अलसाई होगी
सरक आँचल उसके काँधे पर ढलक आया होगा
बेखुदी पर अपनी वो मन ही मन मुस्काई होगी
खुद को उसने जब आईने में संवारा होगा
नज़र उसकी खुद की सूरत पे ठहर आई होगी
अक्स मेरा ही उसे खुद में नज़र आया होगा
एक पल को बिजली सी बदन में लहराई होगी
सुरूर ए इश्क पर वो खुद में ही इठलाई होगी
तड़प मिलने की फिर एक बार उठ आई होगी
हूँ आखिरी सफ़र पर, तुम याद आ रहे हो
मदहोशियों के साए में, मुझे बहका रहे हो
फूल खिल गए हैं ,इस उजड़े हुए चमन में
कुछ बीज फूटते हैं मेरे , बैरागी मन में
मिलने की आस मेरी, बढती ही जा रही है
आ भी जा अब सजना तेरी याद आ रही है |
इन परछाइयों में धुंधली, मैं तुझ ही को ढूंढती हूँ
हिचकी का सबब अपनी, मैं तुझसे ही पूछती हूँ
बस एक बार आजा , जुदा होने से पहले
मैं कह जाऊं दिल की , विदा होने से पहले
मिलने का वादा तुझसे, अगले जनम का करके
लूंगी जमन दुबारा, मैं इस जनम में मरके
बादलों की पार दुनिया मुझको बुला रही है
आ भी जाओ सजना मेरी जान जा रही है
मेरी जान जा रही है $$$ जान जा रही है
मदहोशियों के साए में, मुझे बहका रहे हो
फूल खिल गए हैं ,इस उजड़े हुए चमन में
कुछ बीज फूटते हैं मेरे , बैरागी मन में
मिलने की आस मेरी, बढती ही जा रही है
आ भी जा अब सजना तेरी याद आ रही है |
इन परछाइयों में धुंधली, मैं तुझ ही को ढूंढती हूँ
हिचकी का सबब अपनी, मैं तुझसे ही पूछती हूँ
बस एक बार आजा , जुदा होने से पहले
मैं कह जाऊं दिल की , विदा होने से पहले
मिलने का वादा तुझसे, अगले जनम का करके
लूंगी जमन दुबारा, मैं इस जनम में मरके
बादलों की पार दुनिया मुझको बुला रही है
आ भी जाओ सजना मेरी जान जा रही है
मेरी जान जा रही है $$$ जान जा रही है
बजती नहीं कोई झंकार जाते जाते
टूटते हैं दिल के अब तार जाते जाते
वक़्त ए रुखसती हो चली अब तो यूँ
बस हो जाता तेरा दीदार जाते जाते
पिंजरे से पंछी पल भर में उड़ने को तैयार
टूटती हैं साँसे होता न इंतज़ार जाते जाते
सज़ जाती हिना गर महबूब के नाम की
शमा पा लेती परवाने का प्यार जाते जाते
साँसे उखड़ी हुई दिल बैचैन हुआ जाता है
नज़रों में आता अक्स तेरा करार जाते जाते
खुद से मुख्तलिफ हो तुझसे वफ़ा निभाई
कर जाता तसल्ली-ए-इज़हार जाते जाते
तीरगी बहुत है नूर ए जीस्त की दरकार भी है
दो घडी को ही ले आते तुम बहार जाते जाते
तुझसे मिलने को दिल है बेकरार जाते जाते
तेरे नाम से करती मैं सोलह श्रृंगार जाते जाते
टूटते हैं दिल के अब तार जाते जाते
वक़्त ए रुखसती हो चली अब तो यूँ
बस हो जाता तेरा दीदार जाते जाते
पिंजरे से पंछी पल भर में उड़ने को तैयार
टूटती हैं साँसे होता न इंतज़ार जाते जाते
सज़ जाती हिना गर महबूब के नाम की
शमा पा लेती परवाने का प्यार जाते जाते
साँसे उखड़ी हुई दिल बैचैन हुआ जाता है
नज़रों में आता अक्स तेरा करार जाते जाते
खुद से मुख्तलिफ हो तुझसे वफ़ा निभाई
कर जाता तसल्ली-ए-इज़हार जाते जाते
तीरगी बहुत है नूर ए जीस्त की दरकार भी है
दो घडी को ही ले आते तुम बहार जाते जाते
तुझसे मिलने को दिल है बेकरार जाते जाते
तेरे नाम से करती मैं सोलह श्रृंगार जाते जाते
गर आज मुझ पर वो कुछ महरबां होंगे |
बिन डोर पतंग सी उड़ने के इम्तहां होंगे ||१ ||
बादलों की सैर होगी ओ सूरज से बातें |
अरमानो को लगे पंख आज से कहाँ होंगे || २ ||
बंद पलकों में होगी रौशनी सी चमक |
खुशियों भरे लम्हें हमारे दरमियाँ होंगे || ३ ||
तम्हीद ए सफ़र पर हैं कदम दर कदम |
फैसले किस्मत के ना अपनी रुसवां होंगे ||४ ||
उन संग गुज़रे वक़्त के हम ही राजदाँ होंगे |
जवाँ उम्मीदों संग हम भी कुछ जवाँ होंगे || ५ ||
बिन डोर पतंग सी उड़ने के इम्तहां होंगे ||१ ||
बादलों की सैर होगी ओ सूरज से बातें |
अरमानो को लगे पंख आज से कहाँ होंगे || २ ||
बंद पलकों में होगी रौशनी सी चमक |
खुशियों भरे लम्हें हमारे दरमियाँ होंगे || ३ ||
तम्हीद ए सफ़र पर हैं कदम दर कदम |
फैसले किस्मत के ना अपनी रुसवां होंगे ||४ ||
उन संग गुज़रे वक़्त के हम ही राजदाँ होंगे |
जवाँ उम्मीदों संग हम भी कुछ जवाँ होंगे || ५ ||
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