Monday, August 5, 2013

हूँ आखिरी सफ़र पर, तुम याद आ रहे हो 
मदहोशियों के साए में, मुझे बहका रहे हो 
फूल खिल गए हैं ,इस उजड़े हुए चमन में 
कुछ बीज फूटते हैं मेरे , बैरागी मन में 
मिलने की आस मेरी, बढती ही जा रही है 
आ भी जा अब सजना तेरी याद आ रही है |
इन परछाइयों में धुंधली, मैं तुझ ही को ढूंढती हूँ 
हिचकी का सबब अपनी, मैं तुझसे ही पूछती हूँ 
बस एक बार आजा , जुदा होने से पहले
मैं कह जाऊं दिल की , विदा होने से पहले
मिलने का वादा तुझसे, अगले जनम का करके
लूंगी जमन दुबारा, मैं इस जनम में मरके
बादलों की पार दुनिया मुझको बुला रही है
आ भी जाओ सजना मेरी जान जा रही है
मेरी जान जा रही है $$$ जान जा रही है 

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