पलकों की कोरों पर अक्सर कुछ ख़्वाब पनप जाते हैं
तकिये की नमीं में जागती रातों का किस्सा बयाँ कर जाते हैं
जो रगों में बहता हो लहू बन दिल में धड़कता हो धडकनों सा
बिन कहे भी उसके जज्बात सीधे दिल में उतर ही जाते हैं..
तकिये की नमीं में जागती रातों का किस्सा बयाँ कर जाते हैं
जो रगों में बहता हो लहू बन दिल में धड़कता हो धडकनों सा
बिन कहे भी उसके जज्बात सीधे दिल में उतर ही जाते हैं..
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