Tuesday, August 6, 2013

तन्हाइयों में जीना अब मेरी कहानी है |
बहता हुआ दरिया मेरी आँख का पानी है ||१||

फरेबे मशीयत का मुझे अंदाजा ही न था |
वो छलता रहा औ मैं समझी रिश्ता रूहानी है||२||

यूँ ही उलझ कर रह गयीं अपनी निस्बतें |
एक जान्दान ए कैद में जी रही मेरी जवानी है||३ ||

रंजो गम को भूल अपनीं हस्ती अब लुटानी है |
मेरी बहकती साँसे तेरी मुहब्बत की रवानी है ||४ ||

टूटती उम्मीदों को नयी रौशनी दिखानी है |
उसके नाम की मेहँदी अपने हाथों में रचानी है ||५ ||

खुद मिटने से पहले जुनून ए चाहत निभानी है |
बन मिसाल ए मुहब्बत दिलों में आग लगानी है ||६ ||

लबों से गम के साए पे मुस्कान खिलानी है |
अब आंसुओं को भूल कुछ खुशियाँ चुरानी है || ७ ||.

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