Monday, August 5, 2013

गर आज मुझ पर वो कुछ महरबां होंगे |
बिन डोर पतंग सी उड़ने के इम्तहां होंगे ||१ ||

बादलों की सैर होगी ओ सूरज से बातें |
अरमानो को लगे पंख आज से कहाँ होंगे || २ ||

बंद पलकों में होगी रौशनी सी चमक |
खुशियों भरे लम्हें हमारे दरमियाँ होंगे || ३ ||

तम्हीद ए सफ़र पर हैं कदम दर कदम |
फैसले किस्मत के ना अपनी रुसवां होंगे ||४ ||

उन संग गुज़रे वक़्त के हम ही राजदाँ होंगे |
जवाँ उम्मीदों संग हम भी कुछ जवाँ होंगे || ५ ||

No comments:

Post a Comment