मद भरे ये नैन और अधर खिले गुलाब
तराशा हो जिसे फुर्सत से तुम हो ऐसा माहताब
हुस्न को यूँ परदे में ना छुपाया करो ए नूर ए नज़र
तेरी एक झलक पाने को हम हो जाते हैं बेताब .
तराशा हो जिसे फुर्सत से तुम हो ऐसा माहताब
हुस्न को यूँ परदे में ना छुपाया करो ए नूर ए नज़र
तेरी एक झलक पाने को हम हो जाते हैं बेताब .
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