Tuesday, August 6, 2013

दिल की धडकनों को तुम यूँ छुपाओ ना 'महक'
बात गुजरने से पहले फ़साना बनाओ ना 'महक ' 

किस्से मशहूर हैं बहुत ज़माने में मुहब्बत के 
किस्सा ए वफ़ा खुद का आजमाओ ना 'महक '

ना कह रात की रानी ना कर गुलाब की बातें 
इन बहकती साँसों को यूँ बहकाओ ना 'महक '

खिलते नूर को छुपाने की अदा भाई नहीं हमें 
उलझी लटों को और अब सुलझाओ ना 'महक '

मैं नहीं काबिले मुहब्बत जमाना यही कहता है 
तुम अपनी वादे वफ़ा मुझ पर लुटाओ ना 'महक '

तासीर से ज़माने की डर लगता नहीं है मुझको 
इन सुलग रहे शोलों को और भड़काओ ना 'महक'

मेरे मन का बावरा पंछी बहुत नादान हो रहा है 
तुम अपने जज्बात को हवा में उडाओ ना 'महक '

मिरे ख्वाबों की बस्तियां भी बर्बाद हो गयी है 
तुम मुहब्बत का गुचा ए गुल खिलाओ ना 'महक ' 

महकती चांदनी रातों में बाहर आओ ना 'महक '
इस शबनमी बरसात में तुम यूँ नहाओ ना 'महक '.

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