जिसका जिक्र हमारे हाथों की लकीरों में न था
आज उसी को हमने अपनी तकदीर बना डाला
जिससे दूर दूर तक हमारा वास्ता भी ना था कभी
आज उसी के संग हमने जन्मों का वादा कर डाला
आज उसी को हमने अपनी तकदीर बना डाला
जिससे दूर दूर तक हमारा वास्ता भी ना था कभी
आज उसी के संग हमने जन्मों का वादा कर डाला
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