अपनी सोच पर अंकुश भला कैसे लगा दूँ मैं
मेरी सोच ही तो आइना हैं मेरे व्यक्तित्व की
मैं शब्दों में अपने विचारों को ढाल देती हूँ
मेरी कलम ही तो पहचान है मेरे अस्तित्व की
मेरी सोच ही तो आइना हैं मेरे व्यक्तित्व की
मैं शब्दों में अपने विचारों को ढाल देती हूँ
मेरी कलम ही तो पहचान है मेरे अस्तित्व की
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