मुझको अब ये आंधियां सताने लगीं हैं
मैंने खुली खिड़की में दिया जलाकर रख दिया
हाथों की ओट कर खिड़की पर बैठने लगीं हूँ हर पल
इन तेज हवाओं ने मेरे हौसले को हिलाकर रख दिया
मुमकिन नहीं ये आंधियां बुझा पायें मेरी आशाओं का दिया
इस कहर ने मेरे अपनों को मेरे नज़दीक ला कर रख दिया .
मैंने खुली खिड़की में दिया जलाकर रख दिया
हाथों की ओट कर खिड़की पर बैठने लगीं हूँ हर पल
इन तेज हवाओं ने मेरे हौसले को हिलाकर रख दिया
मुमकिन नहीं ये आंधियां बुझा पायें मेरी आशाओं का दिया
इस कहर ने मेरे अपनों को मेरे नज़दीक ला कर रख दिया .
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