जिंदगी होती जा रही है मेरी हादसों के नाम
इन तल्ख़ अंदाज हादसों से उबारे मुझे कोई
कश्ती डूबती ही जा रही मेरी बीच मझधार में
इंतज़ार है कश्ती संग लगा दे किनारे मुझे कोई
चाहत में जिसकी हमने उम्र तमाम गुज़ार दी
छोड़ गैरों के चल दिया आज सहारे मुझे कोई
इन तल्ख़ अंदाज हादसों से उबारे मुझे कोई
कश्ती डूबती ही जा रही मेरी बीच मझधार में
इंतज़ार है कश्ती संग लगा दे किनारे मुझे कोई
चाहत में जिसकी हमने उम्र तमाम गुज़ार दी
छोड़ गैरों के चल दिया आज सहारे मुझे कोई
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