आज एक शेर पढ़ा और उसको अपनी कलम से आगे बढ़ाया .....
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कर्ज हमारे सभी उतर जाएँ
जिंदगी चैन से गुज़र जाए
अहसान ना रहे किसी का हम पर
चुन चुन कर हिसाब कर जाएँ
पहचान बन जाए ज़माने के लिए
इससे पहले की हम मर जाएँ
जुबाँ पर नाम हो सदियों तक
ऐसा मुकम्मल काम कर जाएँ
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कर्ज हमारे सभी उतर जाएँ
जिंदगी चैन से गुज़र जाए
अहसान ना रहे किसी का हम पर
चुन चुन कर हिसाब कर जाएँ
पहचान बन जाए ज़माने के लिए
इससे पहले की हम मर जाएँ
जुबाँ पर नाम हो सदियों तक
ऐसा मुकम्मल काम कर जाएँ
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