आज मेरे अपने ही मुझे आजमाते क्यों हैं
वफ़ा गैरों संग और मुझसे बेवफाई निभाते क्यों हैं
मैंने तो आस छोड़ दी अब कोई मेरे साथ भी आये
साथ का दिखावा मुझसे ही कर मुझे सताते क्यों हैं
छींटाकशी आम है करना किसी की आबरू पर
मुझ पर तानो की बौछार से लोग मुझे चिढाते क्यूँ हैं
अब तो तमन्ना नहीं के जनाजा किसी अपने के काँधे हो
तानाकशी करके मेरे कथित अपने मुझे रुलाते क्यों हैं
वफ़ा गैरों संग और मुझसे बेवफाई निभाते क्यों हैं
मैंने तो आस छोड़ दी अब कोई मेरे साथ भी आये
साथ का दिखावा मुझसे ही कर मुझे सताते क्यों हैं
छींटाकशी आम है करना किसी की आबरू पर
मुझ पर तानो की बौछार से लोग मुझे चिढाते क्यूँ हैं
अब तो तमन्ना नहीं के जनाजा किसी अपने के काँधे हो
तानाकशी करके मेरे कथित अपने मुझे रुलाते क्यों हैं
No comments:
Post a Comment