Friday, December 14, 2012

आजकल हम जल्दी ही बिस्तर पर जाने लगे 
ख़्वाबों को दुनिया को हम भी आजमाने लगे 

दिन उसके साथ में काटा और रात उसके ख़्वाबों में 
हाल ऐसा हुआ एक दूजे के संग पहरों बिताने लगे 

सोते जागते बस उसी की तस्वीर रहती है सामने
अब आईने में भी हमें उनके अक्स नज़र आने लगे

सपना टूटा तो समझ आया अपने फितूर का फलसफा
दोस्तों लम्बी सर्द रातो को हम नींद से घबराने लगे .

No comments:

Post a Comment