हादसों पर हादसे होते जा रहे हैं रोज तमाम
सर पर कफ़न बाँध कर निकलने लगे हैं लोग
भागती दौड़ती ये जिंदगी हमें विरासत में नहीं मिली
धीरे धीरे इस अजनबी माहौल में ढलने लगें हैं लोग
सांस लेने भर की भी अब फुर्सत नहीं मिलती कभी
बढती व्यस्तता के इस दौर में बदलने लगे हैं लोग
अपनापन नहीं रहा और मह्त्वाकांक्षयें हैं ज्यादा
सर पर कफ़न बाँध कर निकलने लगे हैं लोग
भागती दौड़ती ये जिंदगी हमें विरासत में नहीं मिली
धीरे धीरे इस अजनबी माहौल में ढलने लगें हैं लोग
सांस लेने भर की भी अब फुर्सत नहीं मिलती कभी
बढती व्यस्तता के इस दौर में बदलने लगे हैं लोग
अपनापन नहीं रहा और मह्त्वाकांक्षयें हैं ज्यादा
मौका पड़ने पर ही आपस में मिलने लगे हैं लोग
मतलबी दुनिया में मतलबी होते जा रहे हैं
काम निकल जाने के बाद भूलने लगे हैं लोग
मतलबी दुनिया में मतलबी होते जा रहे हैं
काम निकल जाने के बाद भूलने लगे हैं लोग
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