विकसित होने का अभी शक मत पालो लोगों
गौर करो तुम्हारी तहजीब में दरारें कितनी हैं
महफ़िलों में खाकर जूठन प्लेटों में छोड़ने वालों
बाहर जाकर देखो भूखों की कतारें कितनी हैं
कल का सपना बुनने वाले लापरवाह नौजवानों
संभल जाओ देश को तुमसे उम्मीदें कितनी हैं
गौर करो तुम्हारी तहजीब में दरारें कितनी हैं
महफ़िलों में खाकर जूठन प्लेटों में छोड़ने वालों
बाहर जाकर देखो भूखों की कतारें कितनी हैं
कल का सपना बुनने वाले लापरवाह नौजवानों
संभल जाओ देश को तुमसे उम्मीदें कितनी हैं
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