Thursday, December 13, 2012

अजनबी माहताब हो तुम मेरी रूह को छू लेते हो 
बिखर जाती हूँ मैं ख्यालों में भी तेरा अहसास पाकर
बिखेर चांदनी अपनी मेरे तन को चूम लेते हो तुम 
सिमट जाती हूँ मैं ख्वाबों में भी तेरे नज़दीक आकर

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