अजनबी माहताब हो तुम मेरी रूह को छू लेते हो
बिखर जाती हूँ मैं ख्यालों में भी तेरा अहसास पाकर
बिखेर चांदनी अपनी मेरे तन को चूम लेते हो तुम
सिमट जाती हूँ मैं ख्वाबों में भी तेरे नज़दीक आकर
बिखर जाती हूँ मैं ख्यालों में भी तेरा अहसास पाकर
बिखेर चांदनी अपनी मेरे तन को चूम लेते हो तुम
सिमट जाती हूँ मैं ख्वाबों में भी तेरे नज़दीक आकर
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