तन्हाइयों में मेरा साथ भला कोई निभाता कैसे
भीड़ तो बहुत मिली पर किसी से दिल नहीं मिला
जब किसी ने जख्म दिए ही नहीं तो शिकवा कैसा
पर किसी का प्यार खुद में मुकम्मिल नहीं मिला
भीड़ तो बहुत मिली पर किसी से दिल नहीं मिला
जब किसी ने जख्म दिए ही नहीं तो शिकवा कैसा
पर किसी का प्यार खुद में मुकम्मिल नहीं मिला
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