हमें बदलते मौसम के हिसाब से जीना नहीं आता
मौसम ए मिजाज को बदलने का करीना नहीं आता
यूँ तो बदल जाते हैं मंजर तमाम रात दिन सुबह शाम
हर मंजर के हिसाब से मौजों का सफीना नहीं आता
मौसम ए मिजाज को बदलने का करीना नहीं आता
यूँ तो बदल जाते हैं मंजर तमाम रात दिन सुबह शाम
हर मंजर के हिसाब से मौजों का सफीना नहीं आता
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