जमीर जिसका बचा ना हो वो ज़िंदा नहीं महक
कब्रिस्तानो पर यूँ हक़ की गुंजाइश ठीक नहीं
कद ऊंचा कर लो अपने कुछ अच्छे कर्मों से
पर यूँ इंच इंच कर कब्र की पैमाइश ठीक नहीं
वक़्त के तकाजे को समझो बटोर लो हिम्मत
जो मुनासिब ना हो उसकी आजमाइश ठीक नहीं
ना करो रस्म ए अदाएगी मुकम्मल काम करो
कुछ कर के दिखावे की हो रही नुमाइश ठीक नहीं .
कब्रिस्तानो पर यूँ हक़ की गुंजाइश ठीक नहीं
कद ऊंचा कर लो अपने कुछ अच्छे कर्मों से
पर यूँ इंच इंच कर कब्र की पैमाइश ठीक नहीं
वक़्त के तकाजे को समझो बटोर लो हिम्मत
जो मुनासिब ना हो उसकी आजमाइश ठीक नहीं
ना करो रस्म ए अदाएगी मुकम्मल काम करो
कुछ कर के दिखावे की हो रही नुमाइश ठीक नहीं .
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