अपने अहसास कलम में ढाल मोतियों सा टांक दें
महज लफ्जों में कही बात दिल छुआ नहीं करती
जो लिख रहे हो उसी में खुद को जी कर देखो
अहसासों बिना हों शब्द तो ग़ज़ल नहीं बनती
महज लफ्जों में कही बात दिल छुआ नहीं करती
जो लिख रहे हो उसी में खुद को जी कर देखो
अहसासों बिना हों शब्द तो ग़ज़ल नहीं बनती
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